Tuesday, November 29, 2011

कुछ लिखने की चाह
कुछ नया, कुछ पहचाना सा
लिखने की चाह
प्रेरित करती है मुझको
हर बार
और, उठ पड़ती हू मैं
अपनी कलम के साथ
और, खो जाती हूँ
अंतर्मन की गहराइयों में
जिनकी एक- एक परत
खुलती जाती है
और उतरती जाती है
डायरी के उन कोरे,
सादे पन्नो में
जो बनाते है मेरी पहचान
और बताते है मेरा दृष्टिकोण
जिंदगी के प्रति
स्वयं के प्रति
और हर बार
आत्म संतुष्टि की तलाश में
चलती जाती हू मैं
की शायद कभी
यह थकन
मेरी संतुष्टि बन जाये
और मेरी तलाश ख़त्म हो जाये
इस डायरी के
सादे पन्नो की तरह
** अंजू **








Friday, November 25, 2011

क्षितिज की तलाश


साहिल की तमन्ना किसको थी, तूफानों को अपना बनाया था.
लहरों से मिले मिलकर डूबे, तूफान  न आया, न आना था .