Friday, December 9, 2011

कुछ अनुत्तरित प्रश्न ?



सोचती हूँ कि
वो परम शक्ति, आद्य शक्ति,
जो भी करती है, अच्छा ही करती है
मानती हूँ मैं
अपने अनुभवों से,
जीवन की खट्टी मीठी यादों से
पर फिर भी,
क्यूँ ठिठक कर रह जाती हूँ,
हर बार,
हर नयी परिस्थिति पर,
और, सोचने लगती हूँ
कि,
आखिर इस बात में,
क्या अच्छाई हो सकती है?
जो उस परमात्मा ने,
ज्ञानी, आद्य शक्ति ने ,
किया है इस अज्ञानी आत्मा के साथ
जो उस मोहरूपी अंधकार से परे नहीं है,
जो हर बात में,
सुख और दुःख का हिसाब रखती है ,
और ,
जानना चाहती है कि
उसके हिस्से में क्या आया?
जानती हूँ मैं
विश्वास है मुझे
कि,
वो सब कुछ, जो हम तलाशते हैं
अपने अनुत्तरित
उन सभी प्रश्नों का उत्तरदाता ,
वो एक ही है,
एकमात्र ईश्वर
जो आद्य शक्ति है 
अनंत है |

Friday, December 2, 2011

अस्तित्व !

बिखर रहा था जो वजूद अब तक, हम आज उसको संजोने चले है |
कतरा कतरा जो बन गिर रहा था, हम उन पलों को उठाने चले है |
टपक रहा था ज़ख्म जो दिल से मेरे, हम उसपे मरहम लगाने चले है
हारी थी हमने जो बाज़ी अभी तक, वही आज खुद को जितने चले है |
दफना के अपने उन सभी ग़मों को, आज खुशियों का दीपक जलाने चले है |