सोचती हूँ कि वो परम शक्ति, आद्य शक्ति, जो भी करती है, अच्छा ही करती है मानती हूँ मैं अपने अनुभवों से, जीवन की खट्टी मीठी यादों से पर फिर भी, क्यूँ ठिठक कर रह जाती हूँ, हर बार, हर नयी परिस्थिति पर, और, सोचने लगती हूँ कि, |
आखिर इस बात में, क्या अच्छाई हो सकती है? जो उस परमात्मा ने, ज्ञानी, आद्य शक्ति ने , किया है इस अज्ञानी आत्मा के साथ जो उस मोहरूपी अंधकार से परे नहीं है, जो हर बात में, सुख और दुःख का हिसाब रखती है , और , जानना चाहती है कि उसके हिस्से में क्या आया? जानती हूँ मैं विश्वास है मुझे कि, वो सब कुछ, जो हम तलाशते हैं अपने अनुत्तरित उन सभी प्रश्नों का उत्तरदाता , वो एक ही है, एकमात्र ईश्वर जो आद्य शक्ति है अनंत है | |